पिछले कुछ महीनों से उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के मन में एक ही सवाल घूम रहा था — “क्या स्मार्ट मीटर लगवाना जरूरी है? अगर मना किया तो क्या कनेक्शन कट जाएगा?”
सोशल मीडिया पर इसको लेकर काफी भ्रम फैला हुआ था। लेकिन अब केंद्र सरकार और UPPCL दोनों ने अपनी-अपनी तरफ से स्थिति बिल्कुल साफ कर दी है। इस आर्टिकल में हम आपको वो सब बताएंगे जो आपको जानना जरूरी है।
केंद्र सरकार का आधिकारिक बयान — Smart Meter Optional है
केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल ने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान स्पष्ट किया कि प्री-पेड स्मार्ट मीटर किसी भी उपभोक्ता पर जबरदस्ती नहीं थोपे जा रहे — यह पूरी तरह वैकल्पिक (Optional) है।
- स्मार्ट मीटर लगवाना आपकी मर्जी पर है।
- कोई भी बिजली विभाग का कर्मचारी आपको इसके लिए बाध्य नहीं कर सकता।
- अगर आप अपने पुराने मीटर से खुश हैं, तो कोई दिक्कत नहीं।
UP में बड़ा बदलाव — Prepaid Smart Meter हुए बंद!
UPPCL के MD नितीश कुमार ने 6 मई 2026 को एक विस्तृत आदेश जारी कर सभी DISCOMs और KESCO कानपुर को निर्देश दिया कि सभी स्मार्ट प्री-पेड मीटर को तुरंत पोस्ट-पेड मोड में बदला जाए — और यह काम केंद्रीय RMS बैकएंड सिस्टम के जरिए किया जाए। मई में इस्तेमाल की गई बिजली का बिल, जो जून में आएगा, पोस्ट-पेड सिस्टम के तहत ही बनेगा।
ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने बताया कि यह फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर “उपभोक्ताओं की सुविधा और शिकायतों को ध्यान में रखते हुए” लिया गया है।
यह फैसला क्यों लिया गया?
कई जिलों में उपभोक्ताओं ने प्री-पेड स्मार्ट मीटर से जुड़ी अधिक बिलिंग और अनियमितताओं की शिकायत की थी। कुछ जगहों पर लोगों ने मीटर घर से उखाड़कर सरकारी दफ्तरों और सड़कों पर फेंक दिए।
Smart Meter vs Normal Meter — क्या है फर्क? (Is Smart Meter Mandatory in UP?)
नीचे दी गई तुलना से समझें कि Smart Meter vs Normal Meter में असल अंतर क्या है और UP में अभी स्थिति क्या है:
| विशेषता | पुराना मीटर (Normal) | स्मार्ट मीटर (Smart) |
|---|---|---|
| बिलिंग मोड | केवल पोस्ट-पेड | प्री-पेड / पोस्ट-पेड दोनों |
| अनिवार्यता | अनिवार्य | पूर्णतः वैकल्पिक |
| रीडिंग | मैन्युअल (कर्मचारी द्वारा) | ऑटोमैटिक (रियल-टाइम) |
| नियंत्रण | सीमित | ऐप के जरिए पूर्ण नियंत्रण |
Prepaid Electricity Meter Benefits — सरकार का तर्क क्या था?
मंत्री जी के अनुसार जहाँ-जहाँ प्री-पेड स्मार्ट मीटर लागू हुए, वहाँ बिजली वितरण कंपनियों का घाटा खत्म हुआ और वे मुनाफे में आ गईं। सरकार इन्हें लाने के पीछे ये फायदे गिनाती थी:
- बिलिंग में पारदर्शिता — मीटर रीडर की जरूरत नहीं
- बिजली चोरी पर लगाम — रियल-टाइम मॉनिटरिंग
- मोबाइल से रिचार्ज — कहीं से भी, कभी भी
- DISCOM का घाटा कम — समय पर भुगतान से
लेकिन UP में उपभोक्ताओं की शिकायतों के बाद यह सिस्टम फिलहाल रोक दिया गया है।
अगर आपके दरवाजे पर Smart Meter लगाने आएं — तो क्या करें?
अगर बिजली विभाग की टीम आपके घर स्मार्ट मीटर लगाने आती है:
- घबराएं नहीं — केंद्र सरकार ने खुद कहा है यह Optional है।
- विनम्रता से मना कर सकते हैं — कोई कानूनी बाध्यता नहीं।
- अगर मीटर लग गया है — अब वो Postpaid मोड में काम करेगा, Prepaid नहीं।
- शिकायत हो तो — UPPCL ने 15 मई से 30 जून तक Executive Engineer और SDO के दफ्तरों में विशेष शिकायत निवारण शिविर लगाए हैं।
FAQs
Q1. क्या UP में smart meter लगवाना compulsory है?
नहीं। केंद्रीय बिजली मंत्री ने लोकसभा में स्पष्ट किया है कि यह पूरी तरह वैकल्पिक है।
Q2. UP में prepaid smart meter अभी चालू है या बंद?
UPPCL ने मई 2026 में सभी prepaid smart meters को postpaid mode में बदल दिया है। अभी UP में prepaid billing बंद है।
Q3. Smart meter लगने के बाद बिल कैसे आएगा?
UP में अभी postpaid mode चल रहा है, यानी पहले की तरह हर महीने बिल आएगा।
Q4. क्या smart meter से बिजली का बिल बढ़ता है?
कई उपभोक्ताओं ने अधिक बिलिंग की शिकायत की थी — इसीलिए UPPCL ने prepaid system वापस लिया।
Q5. Smart meter की शिकायत कहाँ करें?
अपने नजदीकी SDO या Executive Engineer के दफ्तर में जाएं, या UPPCL हेल्पलाइन 1912 पर कॉल करें।
निष्कर्ष
अब स्मार्ट मीटर को लेकर कोई भ्रम नहीं होना चाहिए। केंद्र सरकार का कहना है — यह Optional है। और UP सरकार ने Prepaid System फिलहाल बंद कर दिया है। आपका बिजली कनेक्शन पहले की तरह पोस्ट-पेड मोड में चलता रहेगा।
अगर यह जानकारी आपके काम आई हो तो इसे अपने पड़ोसियों और परिवार के साथ WhatsApp पर जरूर शेयर करें। कोई सवाल हो तो नीचे कमेंट करें — हम जवाब देंगे।